
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर headlines में हैं। वजह वही पुरानी लेकिन अंदाज़ नया—Nobel Peace Prize।
ट्रंप इन दिनों खुले तौर पर कह रहे हैं कि नोबेल शांति पुरस्कार के सबसे बड़े हकदार वही हैं, और इस दावे के लिए उन्होंने नॉर्वे तक चिट्ठी भिजवा दी।
नॉर्वे के PM को लिखी चिट्ठी
ट्रंप ने दावा किया कि Nobel Peace Prize पर नॉर्वे का कंट्रोल है और यह सम्मान उन्हें मिलना चाहिए।
उनका कहना है कि नोबेल बोर्ड “गलत लोगों” को सम्मान दे चुका है—और इशारा सीधा 2009 में नोबेल पाने वाले Barack Obama की तरफ था।
भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने का भी क्रेडिट
ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि उन्होंने India-Pakistan war को रुकवाया। उनका दावा है कि दोनों देश nuclear weapons से लैस हैं और हालात nuclear war की तरफ बढ़ रहे थे, लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप कर हालात संभाले।
हालांकि, भारत सरकार पहले ही इस दावे को सिरे से खारिज कर चुकी है और किसी भी तरह की अमेरिकी मध्यस्थता से इनकार कर चुकी है।
‘मैंने 8 युद्ध रोके, 9वां भी रोकूंगा’
ट्रंप यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि अब तक वे 8 wars खत्म करवा चुके हैं और 9वां युद्ध भी जल्द रुकवाएंगे। उनके मुताबिक, इन फैसलों से लाखों लोगों की जान बची, और यही उनके लिए असली पुरस्कार है—हालांकि नोबेल मिले तो “बुरा भी नहीं लगेगा।”
नोबेल से ज्यादा चर्चा जरूरी?
ट्रंप का कहना है कि उन्हें award से ज्यादा लोगों की जान की परवाह है। लेकिन critics तंज कसते हैं कि— अगर जान की परवाह है, तो हर दूसरे हफ्ते नोबेल की याद क्यों आती है?

ओबामा पर भी हमला
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama को लेकर कहा कि “उन्हें कुर्सी पर बैठते ही नोबेल दे दिया गया, जबकि उन्होंने कुछ किया ही नहीं।”
यह बयान भी international politics में नई बहस को जन्म दे रहा है।
सार यही है…
ट्रंप की राजनीति में Peace भी headline है War भी campaign point और Nobel… ultimate trophy
अब सवाल यही है— क्या नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप तक पहुंचेगा, या यह भी एक और वायरल बयान बनकर रह जाएगा?
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